किस्मत बदल गयी
रात की साजिश थी हमारे साथ रहने की |
तन्हाई की तमन्ना थी हमें सहने की ||
ख़ामोशी भी खामोश थी बुत की तरह ,
"बदनसीबी" भी नसीब, ना थी खुद की तरह .....
"आलम ऐ बला" का आलम तो देखिये .......??
हर अंधेरो का अंत तो जानिए ?????????????
ख़ामोशी कितनी जल्द खुशियों मे बदल गयी ..रात की सारी साजिशे ख़तम सी हो गयी ..
जब तन्हाई की तमन्नाये चकनाचूर होगई ....
बदनसीबो की भी क्या किस्मत बदल गयी ........
लक्ष्मी के रूप मे मुझे संध्या मिल गयी
संध्या मिल गयी
नवीन सी दुबे 31/10/2010
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