माँ को सादर समर्पित
माँ एक एहसास ,माँ एक दुआ ,
माँ की याद जैसे जीवन पूरा हुआ ....
वो किलकारियों पे खुश होती थी ,
वो हमारे गिरने पे रोती थी ...
दुलार प्यार ओर ममता का वो भाव
हर गलती पे किया हमारा बचाव
वो मुहँ का निवाला हमें खिलाती थी
खुद जाग कर हमें सुलाती थी
माँ की सीख हमेशा याद आती हें
उनकी याद मे आंखे नम हो जाती हें
नवीन सी दुबे द्वारा दिनांक ५नवम्बर २०१० को लिखी गयी
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